Tuesday, 5 May 2015

बिश्नोई गुरु श्री जाम्भोजी का जीवन परिचय

जम्भेश्वर जी या जाम्भोजी को बिश्नोईयों का गुरु कहा जाता है। जाम्भोजी का जन्म विक्रम सम्वंत १४५१ को नागौर जिला के पीपासर गाओं में हुआ था।  ग्राम पीपासर देश की आजादी के पश्चात भी नागौर जिले में स्थित है /  पीपासर ग्राम नागौर जिले से उत्तर की और स्थित है /  गुरु जाम्भोजी ने बिश्नोई पंथ की शुरुआत की जो की २९ नियमो पर टिका हुआ है  ( २० + ९ = २९ )/ इन २९ नियमो का जो भी मनुष्य पालन करता है  वो बिश्नोई कहलाता है / गुरु जाम्भोजी को बिश्नोई भगवान विष्णु का अवतार मानाजाता है /  
गुरु जाम्भो जी का जीवन परिचय 
ऐसी मान्यता है कि पीपासर ग्राम के क्षत्रिय राजपूत (पंवार ) ठाकुर लोहट जी पंवार और उनकी धर्म पत्नी हंशा देवी के घर में ५० साल की उम्र तक भी कोई संतान नहीं हुई थीं, ग्राम के लोग लोहट को व स्त्रियां हंसा देवी को ताने देती थी / एक बार की बात है की एक किसान ने लोहट जी पंवार इसी तरह का तन कुछ अलग सब्दो में दिया तो लोहट उदास हो गए / पुत्र प्राप्ति हेतु लोहट जी पंवार अपने गुरु के पास सलाह के लिए गए थे।  लोहट को गुरु जी ने सलाह दी की आप भगवन विष्णु की तपस्या करो वही आपके घर आँगन को संतान की किलकारियों से सरोबार करेंगें / लोहट आपने गुरु की सलाह मान कर भगवन विष्णु की तपस्या में लग गए/ लोहट जी की तपस्या से प्रसन हो कर भगवन विष्णु प्रकट हुए और लोहट जी को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया.  


विष्णु भगवान के आशीर्वाद स्वरुप लोहट जी पंवार व हंसा देवी के घर पर एक दिव्य  बालक का जन्म हुआ/ ये दिव्य बालक लोगो में कोतूहल का विषय बन गया / लोग जाम्भोजी को उनके बचपन में अचम्भा तथा जवानी में जम्भ राज नाम से भी पुकारते थे / जाम्भोजी को भगवन विष्णु का अवतार माना जाता है / 
जाम्भो जी के जीवन परिचय को कई भागो में बांटा जा सकता है जिस से की उनका जीवन आसानी से समझा जा सके -
१. जन्म से १२ वर्ष की आयु तक  
२. १३ वर्ष से ३४ वर्ष की आयु तक 
३. ३५ वर्ष की आयु से समाधि तक 



१. जन्म से १२ वर्ष की आयु तक 
जाम्भोजी १२ वर्ष की आयु तक कुछ भी नहीं बोलते थे।  परन्तु उन्होंने अपनी बाल्यावस्था  में लोगो को खूब चमत्कार दिखाए / सबसे पहला चमतकार तो उन्होंने बूढी दे को दिखाया/ फिर सखियो को चमत्कार दिखाए / अपनी माता हंसा देवी को तो नित्य चमतकार दिखाया करते थे/ माता बिस्तर में उनको सुलाकर जाती थी तो जब वो वापस आ कर देखती थी तो अचम्भा बिस्तर में नहीं मिलते थे ये देख कर माता बहुत परेशान हो जाती थी / ऐसा कहा जाता है की जाम्भो जी बचपन में 


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